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College Prayer

सरस्वती वंदना

(1)
जय सरस्वती देवि नमो वर दे,
जय विघ्न विमोचनि बहु वर दे।
जय वीणा पुस्तक धारणि हे,
जय ज्ञान पुंज जग तारणिहे।
जय श्वेत पद्म आसीना हे,
श्वेताम्बर करूणा सीना हे।
कुरू ज्ञान विवर्धन बुद्धिविमलम्,
तववरद हस्त कमलम् शरणम्।
जय सरस्वती देवि नमो वर दे।
जय विघ्न विमोचनि बहु वर दे।
(2)
जय सरस्वती देवि नमो वर दे,
जय विघ्न विमोचनि बहु वर दे।
जय वीणा पुस्तक धारणि हे,
जय ज्ञान पुंज जग तारणिहे।
जय श्वेत पद्म आसीना हे,
श्वेताम्बर करूणा सीना हे।
कुरू ज्ञान विवर्धन बुद्धिविमलम्,
तववरद हस्त कमलम् शरणम्
जय सरस्वती देवि नमो वर दे।
जय विघ्न विमोचनि बहु वर दे।
(3)
हे शारदे मॉ हे शारदे मॉ।
अज्ञानता से हमें तार दे मॉ।
तू स्वर की देवी है संगीत तुझसे,
हर शब्द तेरा है हर गीत तुझसे।
हम है अकेले हम है अधूरे
अपनी शरण में हमें प्यार दे मॉ
हे शारदे मॉ ..........................
ऋषियों ने समझी है मुनियों ने जानी,
वेदों की भाषा पुराणों की वाणी।
हम भी तो समझे, हम भी तो जाने,
विद्या का हमको भी अधिकार दें मॉ।
तू श्वेत वरणी कमल पर विराजे,
हाथों में वीणा मुकुट सिर पे साजे।
घेरे है मन को अंधरे के साये
उजाले का हमको भी संसार दे मॉ।
हे शारदे मॉ ..........................

प्रार्थना

(1)
वह शक्ति हमें दो दया निधेए कर्तव्य मार्ग पर डट जवें
पर सेवा पर उपकार मै हमए जग जीवन सफल बना जावें
हम दीन दुखी निबलोंए विकलों के सेवक बन संताप हरे
जो हैं अटके भूले भटकेए उनको तारें खुद तर जावें
छलए दंभए द्वेषए पाखंडए झूठए अन्याय से निशदिन दूर रहें
जीवन हो शुद्ध सरल अपनाए शुचि प्रेम सुधा रस बरसावे
निजआन मानए मर्यादा का प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे
जिस देश जाति मैं जन्म लियाए बलिदान उसी पर हो जावें
(2)
हमको मन की शक्ति देना मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले खुद को जय करें
भेदभाव अपने दिल से साफ कर सकें
दोस्तों से भूल हो तोए माफ कर सकें
झूठ से बचें रहेंए सच का दम भरें
दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें
मुसकिलें पड़ें तो हम पेए इतना कर्म कर
साथ दें तो धर्म काए चलेंगे धर्म पर
खुद पे हौसला रहे वदी से न डरें
दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें
(3)
इतनी शक्ति हमें देना दाताए मन का विश्वास कमजोर हो ना
हम चलें नेक रास्ते पे हमसेए भूलकर भी कोई भूल हो ना
दूर अज्ञान के हों अंधेरेए तू हमें ज्ञान की रोशनी दे
हर बुराई से बचते रहें हम जितनी भी दे भली जिंदगी दे
बैर हो न किसी का किसी सेए भावना मन मे बदले की हो ना
हम कहले नेक रस्ते पे हमसेए भूलकर भी कोई भूल हो ना
हम न सोचें हमें क्या मिला हैए हम ये सोचें किया क्या है अर्पण
फूल खुशियों के बांटे सभी को सबका जीवन ही बन जाए मधुवन
अपनी करुणा का जल तू बहा देए कर दे पावन हर एक मन का कोना
हम चलें नेक रस्ते पे हमसेए भूलकर कोई भूल हो ना

राष्ट्रगान

जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता
पंजाब-सिन्ध-गुजरात-मराठा
द्राविड़-उत्कल-बंग
विन्ध्य-हिमाचल, यमुना-गंगा
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशिष मांगे
गाहे तव जय गाथा
जन-गण-मंगलदायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय-जय-जय, जय हे
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